हरियाणा की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 2 सितंबर को कुरुक्षेत्र में आयोजित होगी राज्य स्तरीय बीन प्रतियोगिता-डीआईपीआरओ राकेश गौतम
विजेता दल को 75 हजार, द्वितीय को 60 हजार और तृतीय स्थान पर 50 हजार रुपये का मिलेगा पुरस्कार

सोनीपत, 25 अगस्त। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा द्वारा प्रदेश की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 2 सितंबर 2026 को प्रातः 10 बजे मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर, हरियाणा कला परिषद, कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय बीन दलों की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित बीन दल अपनी लोक कला एवं सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी राकेश गौतम ने बताया कि हरियाणा की लोक संस्कृति में बीन वादन की विशिष्ट पहचान है। इस प्रकार की प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा प्रदेश की लोक कला, लोक संगीत एवं पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय बीन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल को 75 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को 60 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा पांच सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक विजेता को 10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
प्रतियोगिता के लिए निर्धारित किए गए हैं नियम
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी राकेश गौतम ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के लिए कुछ आवश्यक मापदंड निर्धारित किए गए हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कलाकारों का हरियाणा का मूल निवासी होना तथा आधार कार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा। प्रत्येक दल में 8 से 10 कलाकारों का होना आवश्यक है। दल में कम से कम 3 से 4 बीन वादकों का होना भी अनिवार्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में प्रस्तुत की जाने वाली प्रस्तुति में हरियाणवी लोक परिधान का प्रयोग करना अनिवार्य होगा। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कलाकारों को किसी प्रकार का यात्रा अथवा दैनिक भत्ता प्रदान नहीं किया जाएगा। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।
लोक कला के संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम
डीआईपीआरओ श्री गौतम ने कहा कि हरियाणा की लोक कलाएं और पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आधुनिक दौर में इन पारंपरिक विधाओं को जीवंत बनाए रखने के लिए कलाकारों को मंच एवं प्रोत्साहन देना बेहद जरूरी है। राज्य स्तरीय बीन प्रतियोगिता जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने और लोक कलाकारों को सम्मान एवं पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने जिले के लोक कलाकारों एवं कला प्रेमियों से आह्वान किया कि वे इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लें और हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति एवं परंपराओं को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।




