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नकली व गैर-मानक घी-मक्खन की बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध, नियमों की अवहेलना पर होगी सख्त कार्रवाई : उपायुक्त नेहा सिंह

- ‘पूजा का घी’, ‘हवन का घी’, ‘कुकिंग घी’ जैसे नामों से गैर-मानक उत्पाद बेचने पर रोक,  मार्जरीन को मक्खन/माखन के नाम से बेचने पर भी प्रतिबंध, मिठाइयों पर निर्माण में प्रयुक्त वसा/तेल की जानकारी देना अनिवार्य

 

सोनीपत,(अनिल जिंदल) 02 सितंबर। हरियाणा सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा उपभोक्ताओं को भ्रामक एवं गैर-मानक खाद्य उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से घी और मक्खन (बटर) के नाम पर बेचे जाने वाले गैर-मानक उत्पादों के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जारी राजपत्र अधिसूचनाओं के अनुसार यह प्रतिबंध पूरे हरियाणा में एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। 17 अगस्त को जारी आदेशों को 21 अगस्त को हरियाणा सरकार के राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि ऐसे किसी भी गैर-मानक या मिलावटी उत्पाद को ‘घी’ के नाम से बेचना प्रतिबंधित है, जो निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करता। उन्होंने कहा कि ‘पूजा का घी’, ‘हवन का घी’, ‘दीया घी’, ‘वनस्पति घी’ अथवा ‘कुकिंग घी’ जैसे नामों या उपसर्गों के माध्यम से गैर-मानक उत्पाद को घी के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को भ्रमित नहीं किया जा सकता। घी के नाम का उपयोग केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पादों के लिए ही किया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार वनस्पति वसा अथवा वनस्पति तेलों से निर्मित मार्जरीन या अन्य फैट स्प्रेड को ‘मक्खन’ अथवा ‘माखन’ के नाम से बेचना या परोसना भी प्रतिबंधित किया गया है। यदि कोई खाद्य व्यवसाय संचालक मार्जरीन या वेजिटेबल फैट स्प्रेड बेचता है तो उसे इसकी स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करनी होगी और उपभोक्ताओं को यह जानकारी देनी होगी कि “मार्जरीन/वनस्पति वसा स्प्रेड — मक्खन नहीं है।”

उपायुक्त नेहा सिंह ने जिला के सभी होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालक, कैटरर्स, मिठाई निर्माता, थोक विक्रेता एवं अन्य खाद्य कारोबार संचालकों से कहा कि वे सरकार द्वारा जारी आदेशों की पूरी तरह पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पैकेज्ड तथा खुले (लूज) दोनों प्रकार के उत्पादों पर ये प्रावधान लागू होंगे।

उन्होंने बताया कि मिठाई निर्माताओं एवं हलवाइयों को भी उपभोक्ताओं के हित में मिठाइयों के निर्माण में इस्तेमाल किए गए माध्यम की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। विशेष रूप से पैक की गई मिठाइयों पर यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक होगा कि उत्पाद ‘देशी घी में निर्मित’ है अथवा ‘वनस्पति वसा/तेल में निर्मित’ है, ताकि उपभोक्ता सही जानकारी के आधार पर खाद्य पदार्थ खरीद सकें।

उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच की जाए और सरकार के आदेशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेश का उल्लंघन करने वाले निर्माता, थोक विक्रेता, रिटेलर, होटल, रेस्टोरेंट अथवा ढाबा संचालक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित उत्पादों को जब्त करने, नियमानुसार नष्ट करने, जुर्माना लगाने तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान है।

उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि सरकार का यह प्रतिबंध निर्धारित गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले असली डेयरी घी और असली बटर पर नहीं है। इसका उद्देश्य केवल गैर-मानक, मिलावटी अथवा भ्रामक नामों से बेचे जा रहे उत्पादों पर रोक लगाकर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य एवं हितों की रक्षा करना है। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय लेबल, गुणवत्ता एवं उत्पाद की सही जानकारी अवश्य जांचें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर इसकी सूचना दें।

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