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डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एसजीटीयू में विशेष कार्यशाला

सीईसी, यूजीसी के सहयोग से आयोजन, 60 से अधिक शिक्षाविदों ने लिया हिस्सा

 

गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) 09 अगस्त। एसजीटी विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एंड्रागॉजिकल एंड पेडागॉजिकल साइंसेज (सीईएपीएस) द्वारा कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (सीईसी) व यूजीसी के सहयोग से शिक्षाविदों के लिए ऑनलाइन एमओओसीज जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (एमओओसीज) के विकास की प्रक्रिया से परिचित कराना तथा भारत की डिजिटल उच्च शिक्षा पहलों में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला में एसजीटी विश्वविद्यालय के 60 से अधिक फैकल्टी सदस्यों, कोर्स कोऑर्डिनेटर्स और अकादमिक विद्वानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्र के दौरान शिक्षाविदों को भारत सरकार की ऑनलाइन शिक्षा पहलों के तहत एमओओसीज की योजना, विकास, इंस्ट्रक्शनल डिजाइन तथा प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कर्नल पी.एस. जेम्स, निदेशक, सीईएनटी के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, लचीली शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा संस्थानों को राष्ट्रीय डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम से जोड़ने में एमओओसीज की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एसजीटी विश्वविद्यालय शिक्षण-अधिगम की नवीन पद्धतियों को बढ़ावा देने और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में फैकल्टी की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

तकनीकी सत्र में डॉ. चंदन गुप्ता, निदेशक, एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर (ईएमआरसी), इंदौर ने विशेषज्ञ रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने एमओओसीज के विकास की पूरी प्रक्रिया, इंस्ट्रक्शनल डिजाइन के सिद्धांतों, कंटेंट निर्माण, प्रोडक्शन वर्कफ्लो, गुणवत्ता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया, प्रमाणन व्यवस्था तथा एमओओसीज के प्रस्ताव प्रस्तुत करने संबंधी दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी।

इंटरैक्टिव सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने संस्थागत स्वीकृति, पात्रता मानदंड, कोर्स विकास की समय-सीमा तथा परीक्षाओं से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। विशेषज्ञ ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए एमओओसीज तैयार करने की व्यावहारिक प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया।

कार्यशाला के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में फैकल्टी सदस्यों की डिजिटल लर्निंग पहलों में भागीदारी को लेकर विशेष रुचि देखने को मिली। प्रतिभागियों ने कार्यशाला में मिली व्यावहारिक जानकारी की सराहना की और अपने-अपने विषयों में एमओओसीज विकसित करने के प्रति उत्साह व्यक्त किया।

इस अवसर पर डॉ. आस्था चौधरी, निदेशक, सीईएपीएस ने कहा कि विश्वविद्यालय डिजिटल पेडागॉजी को मजबूत करने और फैकल्टी सदस्यों को राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक पहलों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सीईसी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ इस प्रकार का सहयोग फैकल्टी की दक्षताओं को बढ़ाने के साथ-साथ विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता और नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यशाला का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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