बीपीएसएमवी में ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम, छात्राओं ने बेबाकी से पूछे सवाल
डॉ. अर्चन गुप्ता ने नीट , नई शिक्षा नीति, डिजिटल क्रांति, महिला आरक्षण, मानसिक स्वास्थ्य सहित विभिन्न विषयों पर किया संवाद


“महिला प्रदेश अध्यक्ष का बेटियों के बीच आकर संवाद करना ऐतिहासिक क्षण”—कुलपति प्रो. सुदेश
खानपुर कलां, 18 सितंबर 2026। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में आज ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश ने की, जबकि हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चन गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। डॉ. गुप्ता ने विश्वविद्यालय की छात्राओं के साथ विभिन्न समसामयिक, शैक्षणिक, सामाजिक एवं युवा-केंद्रित विषयों पर सीधा संवाद किया। छात्राओं ने भी बेबाकी से अपने प्रश्न रखे और डॉ. गुप्ता ने उनका उत्तर दिया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. सुदेश ने कहा कि विश्वविद्यालय में ‘युवा संवाद’ का आयोजन पूरे संस्थान के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है कि एक महिला प्रदेश अध्यक्ष के रूप में छात्राओं के बीच आकर उनसे संवाद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय उत्तर भारत का ऐसा विशिष्ट संस्थान है, जो स्वतंत्रता से पहले से ही महिला शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है और देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा बेटियों को शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान करने से जुड़ी रही है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहते हुए शिक्षा एवं कौशल के माध्यम से समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
नीट और पेपर लीक पर छात्रा के सवाल का दिया जवाब
संवाद के दौरान एक छात्रा ने नीट परीक्षा में पेपर लीक से संबंधित प्रश्न पूछा। इसके जवाब में डॉ. अर्चन गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं से जुड़े विषयों को गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक के विरुद्ध कानून को और कठोर किया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के हितों की रक्षा करना है। केंद्र ने 2026 में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स ) कानून में संशोधन कर दंड को और कड़ा किया है; संशोधित कानून में संगठित अपराध के मामलों में अधिक कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि उनके अनुसार पुनः परीक्षा आयोजित होने के बाद विद्यार्थियों में सकारात्मक भावना देखने को मिली। उन्होंने सरकार द्वारा परीक्षा संबंधी निर्णयों और समयबद्ध कार्रवाई का भी उल्लेख किया।
शिक्षा में डिग्री के साथ कौशल पर जोर
नई शिक्षा नीति और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल पर डॉ. गुप्ता ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में कौशल, आत्मविश्वास और रोजगार की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का जोर कौशल विकास और ऐसी शिक्षा व्यवस्था पर है, जिससे युवा रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार देने की क्षमता भी विकसित कर सकें।
उन्होंने स्किल डेवलपमेंट स्टार उप इंटरप्रेंयूर्शिप और युवा-केंद्रित शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को बदलती अर्थव्यवस्था और तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए।
यू पी आई शुल्क पर छात्रा के सवाल पर कहा—“अधूरी जानकारी नहीं देना चाहती”
एक छात्रा ने यू पी आई लेन-देन पर ₹2,000 से अधिक की राशि के संबंध में लगाए जाने वाले संभावित शुल्क से जुड़ा सवाल पूछा। इस पर डॉ. गुप्ता ने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह अधूरी जानकारी देकर छात्राओं को भ्रमित नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर जानकारी तथ्यों के आधार पर ही साझा की जानी चाहिए।
डिजिटल क्रांति का किया उल्लेख
डिजिटल तकनीक से जुड़े सवाल पर डॉ. गुप्ता ने कहा कि भारत में डिजिटल क्रांति ने आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित किया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान और तकनीक के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में डिजिटल लेन-देन का दायरा तेजी से बढ़ा है।
परिसीमन पर बोलीं डॉ. गुप्ता
एक छात्रा ने लोकसभा सीटों के परिसीमन से संबंधित प्रश्न पूछा। डॉ. गुप्ता ने कहा कि परिसीमन के संबंध में देश के सभी क्षेत्रों के साथ समानता का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच असमानता पैदा होने की आशंकाओं को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे उनके अनुसार भ्रम पैदा करने वाली हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2029 तक नया परिसीमन सामने आ सकता है।
महिला आरक्षण पर छात्राओं से साझा किए विचार
महिला आरक्षण से जुड़े प्रश्न पर डॉ. गुप्ता ने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने महिला आरक्षण कानून के संदर्भ में विभिन्न राजनीतिक दलों के रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब अधिक महिलाएं प्रतिनिधि के रूप में सामने आएंगी तो महिलाएं अपनी समस्याओं को उनके सामने अधिक सहजता से रख सकेंगी। उन्होंने महिलाओं की बहु कार्य क्षमता और संवेदनशीलता का भी उल्लेख किया तथा उम्मीद जताई कि महिला आरक्षण से संबंधित प्रावधान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेंगे।
छात्राओं से मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया के दबाव पर बात करने का आह्वान
डॉ. गुप्ता ने छात्राओं से कहा कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं एक-दूसरे के लिए अभिभावक और सहारा बनकर रहें। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर बात करनी चाहिए।
उन्होंने छात्राओं को सोशल मीडिया से बढ़ते मानसिक दबाव, तुलना और अपेक्षाओं के प्रभाव पर भी चर्चा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी परेशानी को मन में दबाकर रखने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति, शिक्षक या परिवार के सदस्य से बात करनी चाहिए।
चिकित्सा शिक्षा और आयुष को लेकर भी हुआ संवाद
चिकित्सा शिक्षा से संबंधित प्रश्न के जवाब में डॉ. गुप्ता ने कहा कि सरकार द्वारा एम बी बी एस और बी ए एम एस सहित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के विद्यार्थियों के लिए अवसरों का विस्तार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने आयुष सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की अपनी भूमिका है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिकित्सा पद्धति के विद्यार्थियों को अपनी निर्धारित शिक्षा और पेशेवर दायरे के अनुरूप कार्य करना चाहिए।
विवाहित महिलाओं के साथ यौन हिंसा पर छात्रा ने पूछा सवाल
छात्रा याशिका ने विवाहित महिलाओं के साथ यौन हिंसा से संबंधित प्रश्न उठाया। इस पर डॉ. गुप्ता ने कहा कि महिला की इच्छा के विरुद्ध किसी भी प्रकार का यौन व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और घरेलू हिंसा के विरुद्ध देश में कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि परिवारों को बेटों और बेटियों दोनों को महिलाओं के सम्मान और समानता के प्रति स्पष्ट रूप से शिक्षित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं एवं कानून बनाए गए हैं, लेकिन सामाजिक सोच में बदलाव भी उतना ही आवश्यक है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को अपने भीतर यह विश्वास पैदा करना चाहिए कि उनके साथ गलत होने पर वे आवाज उठा सकती हैं। उन्होंने छात्राओं से गलत के खिलाफ आवाज उठाने और एक-दूसरे का साथ देने का आह्वान किया।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार
डॉ. गुप्ता ने कहा कि देश में मेडिकल शिक्षा के अवसरों का विस्तार, नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, कौशल विकास और शिक्षा में तकनीक का उपयोग युवाओं के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने विशेष रूप से पुरुषों की सोच में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान, समानता और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना केवल सरकार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे और डॉ. गुप्ता ने उनके साथ खुला संवाद किया। कार्यक्रम ने छात्राओं को समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार रखने तथा एक जनप्रतिनिधि के साथ सीधे संवाद करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम में गोहाना जिला अध्यक्ष बिजेन्दर मलिक , बीजेपी प्रदेश सचिव विकास दहिया , प्रदीप बड़वासनी , किरण कलकल , विश्वविद्यालय के शिक्षक गण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।




