जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने शिक्षण संस्थानों में चलाया विधिक जागरूकता अभियान
पोक्सो अधिनियम, कुपोषण उन्मूलन, मानव तस्करी एवं गुमशुदा बच्चों के प्रति विद्यार्थियों को किया जागरूक

सोनीपत, 05 अगस्त। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचकूला के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, के तत्वावधान में बुधवार को जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पोक्सो अधिनियम, कुपोषण उन्मूलन, मानव तस्करी एवं गुमशुदा बच्चों के संबंध में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रचेता सिंह ने बताया कि जागरूकता कार्यक्रमों उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन में विधिक साक्षरता बढ़ाना तथा बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति समाज को जागरूक बनाना रहा।
द्रोण विद्या पीठ, सोनीपत में आयोजित कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, के पैनल अधिवक्ता शिवम कथपालिया ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को बाल लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012 (पोक्सो अधिनियम) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पोक्सो अधिनियम के उद्देश्य, बच्चों के अधिकार, बाल यौन शोषण की रोकथाम, अपराध की सूचना देने के महत्व, पीड़ित बच्चों को उपलब्ध कानूनी संरक्षण तथा विद्यालय, अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार के शोषण अथवा अनुचित व्यवहार की सूचना बिना किसी भय के संबंधित अधिकारियों को देने का आह्वान किया।
इसी क्रम में राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, असदपुर नंदनौर, सोनीपत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पैनल अधिवक्ता नवनीत ने “स्वस्थ बालक, सशक्त राष्ट्र–कुपोषण उन्मूलन”, “मानव तस्करी एवं गुमशुदा बच्चों के प्रति जागरूकता” तथा “पोक्सो अधिनियम” विषयों पर जानकारी दी।
उन्होंने बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व पर बल देते हुए कुपोषण उन्मूलन में परिवार, विद्यालय एवं समाज की सामूहिक भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही मानव तस्करी एवं गुमशुदा बच्चों से जुड़े अपराधों के प्रति जागरूक करते हुए सुरक्षा उपायों, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा समय पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के महत्व की जानकारी दी। पोक्सो अधिनियम के संबंध में विद्यार्थियों को बाल यौन अपराधों से सुरक्षा, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, पीड़ित की गोपनीयता तथा दोषियों के लिए कानून में निर्धारित कठोर दंड के प्रावधानों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने तथा बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं भयमुक्त वातावरण के निर्माण में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया गया।




