स्वतंत्रता का अर्थ केवल आज़ादी नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर, न्याय और निर्भय जीवन भी है : संजय राठी

चंडीगढ़, 14अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस पर मीडिया काउन्सिल ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय राठी ने देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने का अवसर नहीं, बल्कि देश की उपलब्धियों के साथ-साथ सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर आत्ममंथन करने का भी दिन है।
संजय राठी ने कहा कि भारत ने पिछले 79 वर्षों में विज्ञान, अंतरिक्ष, रक्षा, कृषि, डिजिटल तकनीक, चिकित्सा, उद्योग और आधारभूत ढाँचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है, लेकिन किसी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक मूल्यांकन यह देखकर होना चाहिए कि आम नागरिक, किसान, विद्यार्थी, युवा और गरीब परिवार के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया
संजय राठी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों की महान सभ्यता, ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा वाला देश है। वेद-उपनिषद, योग, आयुर्वेद, नालंदा-तक्षशिला, बौद्ध एवं जैन दर्शन, भक्ति-सूफी परंपरा, भारतीय संगीत, नृत्य, साहित्य और लोक संस्कृति हमारी अमूल्य विरासत हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत “विविधता में एकता” है। आधुनिक भारत का निर्माण अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखते हुए विज्ञान, तकनीक और आधुनिक विचारों के साथ आगे बढ़कर किया जाना
संजय राठी ने कहा कि आज भारत के सामने नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और ऊर्जा को सही दिशा देने की बड़ी चुनौती है। यह पीढ़ी डिजिटल युग में पली-बढ़ी है, प्रश्न पूछती है, तेजी से सीखती है और अपने भविष्य तथा अधिकारों के प्रति जागरूक है।
उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को केवल नाराजगी या अनुशासन की कमी के रूप में देखना गलत होगा। उनकी भावनाओं, असुरक्षाओं, आकांक्षाओं और विचारों को समझना होगा।राजनीतिक दलों और सरकारों को युवाओं को केवल मतदाता समूह समझने की मानसिकता बदलनी होगी। पंचायत से संसद तक, प्रशासन, उद्योग, विज्ञान, मीडिया और सामाजिक संस्थाओं में युवाओं को नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में अधिक अवसर मिलने चाहिए।
नई पीढ़ी की ऊर्जा को केवल सामाजिक माध्यमों की बहसों तक सीमित न रखकर राष्ट्र निर्माण की ऊर्जा बनाना होगा।
राठी ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक युवाओं के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराना है। प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, भर्ती प्रक्रिया का लंबा खिंचना, परिणामों में विलंब और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएँ लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने कहा कि निश्चित भर्ती कैलेंडर, समय पर परीक्षा, समयबद्ध परिणाम और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रखने के बजाय उद्यमिता, स्वरोजगार, कौशल विकास, कृषि आधारित उद्योग और डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे।
किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राठी ने कहा कि कृषि क्षेत्र को केवल चुनावी मुद्दा न बनाकर दीर्घकालीन राष्ट्रीय नीति का विषय बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के वर्ष 2024 के आँकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,546 लोगों की आत्महत्या दर्ज की गई, जिनमें 4,633 किसान तथा 5,913 कृषि मजदूर थे।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों की पीड़ा को दर्शाते हैं।
किसानों को बेहतर फसल मूल्य, प्रभावी फसल बीमा, सिंचाई, सस्ता संस्थागत ऋण, भंडारण, कृषि प्रसंस्करण और टिकाऊ खेती के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन आँकड़ों में मृतक का व्यवसाय दर्ज होता है और प्रत्येक आत्महत्या का कारण निर्धारित नहीं किया जाता। इसलिए हर मामले को केवल कर्ज या फसल नुकसान से जोड़ना उचित नहीं होगा। फिर भी यह संख्या राष्ट्रीय चिंता का गंभीर विषय है।
राठी ने कहा कि भारत ने गरीबी कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन गरीबी को केवल एक आंकड़े से नहीं समझा जा सकता।
यदि किसी परिवार के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और स्थायी रोजगार नहीं है तो आर्थिक असुरक्षा बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाना नहीं, बल्कि स्थायी आर्थिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार उपलब्ध कराना होना चाहिए।
मीडिया काउन्सिल ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियादी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी आवश्यक है। झूठी खबरें, पेड न्यूज, अफवाह और घृणा फैलाने वाली सामग्री लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव दोनों को नुकसान पहुँचाती हैं।
राठी ने कहा कि स्वतंत्र और निर्भीक मीडिया लोकतंत्र का प्रहरी है। उन्होंने कहा कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की स्थिति चिंता का विषय है और देश को पत्रकारिता की स्वतंत्रता तथा पत्रकारों की सुरक्षा के क्षेत्र में और बेहतर वातावरण तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव, पत्रकारों की आर्थिक असुरक्षा, ऑनलाइन धमकियाँ और मुकदमे जैसी चुनौतियों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
राठी ने कहा कि समाचार-पत्र, दूरदर्शन और रेडियो के साथ-साथ समाचार-पत्रों के डिजिटल संस्करण, समाचार पोर्टल, सामाजिक माध्यम, वीडियो मंच, श्रव्य कार्यक्रम, मोबाइल पत्रकारिता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पत्रकारिता का स्वरूप बदल दिया है।
नए माध्यम ने आम नागरिक को अपनी बात दुनिया तक पहुँचाने की शक्ति दी है। अब समाचार केवल बड़े मीडिया संस्थानों से जनता तक नहीं पहुँचता, बल्कि जनता भी स्वयं समाचार और सूचना का स्रोत बन गई है।
लेकिन इसके साथ गंभीर चुनौतियाँ भी हैं।
कोई भी व्यक्ति कुछ सेकंड में फोटो, वीडियो या संदेश लाखों लोगों तक पहुँचा सकता है। लेकिन हर प्रसारित सामग्री सत्य नहीं होती।
झूठी खबरें, भ्रामक सूचनाएँ, जानबूझकर फैलाया गया दुष्प्रचार, कृत्रिम रूप से तैयार किए गए वीडियो और चित्र लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और व्यक्ति की प्रतिष्ठा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।कृत्रिम बुद्धिमत्ता पत्रकारिता के लिए नए अवसर लेकर आई है, लेकिन इसके दुरुपयोग से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो को बदलकर झूठी सामग्री तैयार की जा सकती है। इसलिए भविष्य की पत्रकारिता में तथ्य-जांच और सत्यापन का महत्व और बढ़ेगा।नए माध्यम ने नागरिक पत्रकारिता को मजबूत किया है। किसी घटना का प्रत्यक्षदर्शी व्यक्ति तत्काल फोटो या वीडियो साझा कर सकता है। यह लोकतंत्र के लिए उपयोगी है।
राठी ने कहा कि नए माध्यम में क्लिक, दर्शक, पसंद और साझा किए जाने की संख्या की प्रतिस्पर्धा कई बार सनसनीखेज पत्रकारिता को बढ़ावा देती है।
उन्होंने सरकार, मीडिया संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और पत्रकार संगठनों से मिलकर ऐसा वातावरण बनाने की अपील की जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता और जन-जवाबदेही दोनों सुरक्षित रहें
राठी ने कहा कि लोकतंत्र केवल पाँच वर्ष में एक बार मतदान करने का नाम नहीं है।
लोकतंत्र का अर्थ है—
राजनीति में धनबल, बाहुबल, जातीय और धार्मिक ध्रुवीकरण तथा व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए चिंता का विषय है
उन्होंने कहा कि किसी देश की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों की शिक्षा और स्वास्थ्य से तय होती है।
सरकारी स्कूलों और अस्पतालों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर शिक्षा और स्वास्थ्य का आर्थिक बोझ कम होना चाहिए।
शिक्षा में वैज्ञानिक सोच, संवैधानिक मूल्य, कौशल, चरित्र और रोजगार क्षमता का विकास होना चाहिए।
राठी ने कहा कि वायु प्रदूषण, जल संकट, गिरता भूजल, जलवायु परिवर्तन और हरित क्षेत्र में कमी भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी हैं।
उन्होंने जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, पौधारोपण और प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय जन-अभियान बनाने की आवश्यकता पर बल
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता है। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटने की राजनीति देश की एकता को कमजोर करती है।
उन्होंने कहा कि हमारी विविधता कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की शक्ति है।
संजय राठी ने केंद्र और राज्य सरकारों तथा सभी राजनीतिक दलों से रोजगार, युवाओं का भविष्य, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, किसान सुरक्षा, गरीबी और असमानता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पत्रकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और युवाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि इन विषयों पर राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सहमति की आवश्यकता है
संजय राठी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर देश को ऐसा भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए जो आर्थिक रूप से शक्तिशाली होने के साथ-साथ सामाजिक और लोकतांत्रिक रूप से भी मजबूत हो।
ऐसा भारत जहाँ युवा को अवसर मिले, नई पीढ़ी को नेतृत्व मिले, विद्यार्थी को निष्पक्ष व्यवस्था मिले, किसान को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिले, गरीब को शिक्षा और स्वास्थ्य मिले, नागरिक निर्भय होकर प्रश्न पूछ सके और पत्रकार बिना दबाव के सच लिख सके।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सच्चा सम्मान तभी होगा जब भारत को न्यायपूर्ण, समृद्ध, शिक्षित, सुरक्षित, समावेशी और लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए।




