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बच्चों की भावनात्मक व मानसिक हेल्थ पर स्कूलों की भूमिका में बदलाव जरूरी, राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने किया आह्वान

एसजीटीयू, एक्सप्रेशन इंडिया व मूलचंद अस्पताल का संयुक्त आयोजन 

गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) 10 जुलाई। विद्यार्थियों के भावनात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य को लेकर स्कूलों की भूमिका में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए शिक्षाविदों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने कहा है कि अब समय आ गया है कि विद्यालय केवल शिक्षा देने वाले संस्थान न रहकर विद्यार्थियों के समग्र मानसिक विकास के केंद्र बनें। इसी उद्देश्य से एसजीटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम द्वारा एक्सप्रेशन इंडिया एवं मूलचंद अस्पताल के सहयोग से इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में स्कूल मेंटल हेल्थ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया।

“धारणा से प्रदर्शन तक: परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में विद्यालय” विषय पर आयोजित इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, स्कूल प्रधानाचार्यों, मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों तथा काउंसलरों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विद्यालयी शिक्षा की मुख्यधारा में मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावी ढंग से शामिल करने तथा विद्यार्थियों के लिए मजबूत मानसिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करने की व्यावहारिक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में श्रीमती रीना सोनोवाल कौली, संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि देवेंद्र कुमार शर्मा, निदेशक, शिक्षा मंत्रालय, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर प्रो. जे.बी. राव ने कहा कि आज शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उन्हें ऐसे संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण का निर्माण करना होगा, जो प्रत्येक विद्यार्थी के भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य के समग्र विकास को सुनिश्चित करे।

कॉन्क्लेव के दौरान दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी नीतियों को कक्षा स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने तथा बच्चों एवं किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान और हस्तक्षेप के लिए विद्यालयी तंत्र को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान एनसीईआरटी, दिल्ली विश्वविद्यालय, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ तथा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों से आए विशेषज्ञों ने मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित शिक्षण वातावरण विकसित करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं, नवाचारों और सहयोगात्मक प्रयासों को साझा किया।

शैक्षणिक नेतृत्व में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विद्यालय प्रमुखों को ‘प्रिंसिपल्स लीडरशिप अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान डॉ. एच.के. चोपड़ा, अध्यक्ष, कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया; प्रो. विनोद के. शनवाल, प्रभारी, मनोदर्पण सेल, एनसीईआरटी; तथा डॉ. मनोरंजिनी, प्रमुख एवं निदेशक, अमृता विद्यालयम की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के अंतर्गत “विद्यालयों में व्यवहारगत आपात स्थितियां : सामाजिक एवं कानूनी परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक केस-आधारित कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें डॉ. विभा शर्मा (आईएचबीएएस), प्रो. ऋतु शर्मा (इग्नू), डॉ. किरण डंगवाल (लखनऊ विश्वविद्यालय) तथा सुश्री निश्ता ग्रोवर (राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय) सहित विशेषज्ञों ने व्यवहारगत संकटों के प्रबंधन, कानूनी दायित्वों तथा संस्थागत तैयारी के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की।

कॉन्क्लेव का समापन स्कूल काउंसलर्स अवॉर्ड्स एवं वेलबीइंग चैंपियन अवॉर्ड्स के वितरण के साथ हुआ, जिनके माध्यम से विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों को सम्मानित किया गया। समापन सत्र में माननीय न्यायमूर्ति बी. आनंद, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण तथा डॉ. राजेंद्र के. धमीजा, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (आईएचबीएएस) ने शिक्षा जगत, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं के बीच सतत सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यालय को बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और पोषणकारी वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य करना होगा।

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