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अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, नियमों की अनदेखी पर होगी सख्त कार्रवाई – उपायुक्त नेहा सिंह

कुंडली नगर पालिका की डंपिंग साइट व प्रोसेसिंग कार्य की जांच के लिए एसडीएम सुभाष चंद्र की अध्यक्षता में कमेटी का गठन, अपशिष्ट प्रबंधन को गंभीरता से लेते हुए करे सभी संबंधित विभाग कार्य

-सभी स्कूलों, लघु सचिवालय में चार प्रकार के डस्टबिन लगाने, अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के दिए निर्देश

सोनीपत, 21 जुलाई। उपायुक्त नेहा सिंह ने कहा कि जिले में अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाए। अपशिष्ट के संग्रहण, परिवहन, डंपिंग एवं प्रोसेसिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी व ठेकेदार द्वारा नियमों की अनदेखी की गई तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मंगलवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार कक्ष में उपायुक्त नेहा सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन समिति (डीएलसीआईडब्ल्यूएम) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भोपाल नगर निगम बनाम डॉ. सुभाष चंद्र पांडे एवं अन्य मामले में दिए गए निर्देशों तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की गई।

उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला में अपशिष्ट डंपिंग साइट एवं प्रोसेसिंग कार्य का ठेकेदारों के साथ नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए तथा सभी कार्य निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी स्कूलों, लघु सचिवालय, में चार प्रकार के डस्टबिन जिसमें गीले कचरे, सूखे कचरे, सैनिटरी कचरे तथा खतरनाक/विशेष कचरे शामिल है, अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक में औद्योगिक, जैव-चिकित्सा, निर्माण एवं विध्वंस, बागवानी, कृषि अवशेष, गोबर तथा प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन की समीक्षा भी की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को अपने-अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करने तथा नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कुंडली नगर पालिका क्षेत्र में घर-घर से एकत्र किए जा रहे अपशिष्ट की डंपिंग साइट एवं प्रोसेसिंग कार्य की जांच के लिए एसडीएम सुभाष चंद्र की अध्यक्षता में समिति गठित करते हुए शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी एमसी केंद्रीय पोर्टल पर अपना तथा संबंधित ठेकेदारों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से करवाएं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत की भूमि पर किसी भी ठेकेदार द्वारा कचरा न डाला जाए। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा ग्राम स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन निगरानी समितियों का गठन करने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि निजी अस्पतालों के साथ बैठक कर जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित कराई जाए। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति विद्यार्थियों एवं आमजन को जागरूक करने के लिए स्कूलों, ग्राम पंचायतों, ब्लॉक समितियों तथा शहरी क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

उन्होंने बल्क वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सभी साइट की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का प्रभावी क्रियान्वयन सभी विभागों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी लक्ष्य पूर्ण करने तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अनमोल, सीटीएम सिमरन, संयुक्त आयुक्त नगर निगम मीतू धनखड़, एसीपी निधि नैन, आरओ अजय मलिक, डीडीपीओ मनीष मलिक सहित संबंधित विभागों के कार्यकारी अभियंता एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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