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‘सबमें राम को देखिये, तभी राम को अपने पास पाएंगे’, चेतना के ‘रामायण महोत्सव 5.0’ में दिखे भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व के विविध रूप,

भारतीय होने का मतलब ही सनातनी: डॉ पवन सिन्हा 

• परिवार का महत्व बताने को ही श्रीराम मानव रूप में अवतरित हुए: डॉ आदित्य शुक्ल

सोनीपत,(अनिल जिंदल) 29 जून । सनातन की प्रबल प्रहरी संस्था चेतना का रविवार को ‘रामायण महोत्सव-5.0’ राम नाम की ऐसी ज्योत प्रज्वलित कर गया जो हर भारतवासी को वर्षों तक पिता, पुत्र, धर्मपत्नी, भाई, सखा, सास, ससुर, सलाहकार, सहयोगी, अनुयायी और निकट संबंधियों के दायित्वों, अपेक्षाओं का अहसास करवाता रहेगा।

‘रामायण महोत्सव 5.0’ के आयोजकों द्वारा यहां उपलब्ध करवाई गई जानकारी के मुताबिक प्रखर वक्ताओं ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन-दर्शन के उन पहलुओं को दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 10 स्थित होटल क्राउन प्लाजा के खचाखच भरे सभागार में ऑडियंस के सामने रखा जो गहन अनुसंधान के बाद संकलित किए गए थे। चेतना का यह 78 वां सेमिनार था।

70 देशों में राम कथा कर चुके विश्व विख्यात कवि, लेखक, चित्रकार, गायक एवं कथाकार बाबा सत्यनारायण मौर्य ने वाणी और तूलिका से ऐसी रामधुन छेड़ी कि उपस्थित सभी लोग सम्मोहित होकर घंटों उनका व्याख्यान सुनते रहे, रामनाम का जयकारा लगा कर थिरकते रहे।

‘राष्ट्र देव श्रीराम’, ‘प्रशासन में राम’, ‘राष्ट्र में राम’, ‘परिवार में राम’, ‘कविता में राम’, ‘संगीत में राम’, ‘नृत्य में राम’ विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, मर्मज्ञों ने भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व पर व्याख्यान दिया।

चेतना (सुरभि सनातन की) के अध्यक्ष और ख्यातिप्राप्त अंतरराष्ट्रीय कवि राजेश चेतन का प्रभावशाली मंच संचालन सोने पर सुहागा साबित हुआ।

कार्यक्रम के प्रायोजक और समाजसेवी डॉ पवन कंसल (चेयरमैन जगदंबा कटलरी) ने भगवान श्रीराम का काव्यात्मक गुणगान करके माहौल को राममय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

‘बच्चा- बच्चा राम का जन्म भूमि के काम का’ और ‘रामलला हम आएंगे

मंदिर वहीं बनाएंगे’ जैसे नारों से राम मंदिर निर्माण मिशन को प्रचंड आंदोलन बनाने वाले कवि, लेखक, चित्रकार, गायक एवं कथाकार बाबा सत्यनारायण मौर्य ने ‘राष्ट्रदेव श्रीराम’ विषय पर बेहद प्रभावशाली व्याख्यान में राम कथा का महत्व बताया, संस्कारों की महत्ता गिनाई, रामनाम के उच्चारण का मन, मस्तिष्क पर असर बताया। विभिन्न दायित्वों, सरोकारों का अर्थ समझाया।

बाबा सत्यनारायण मौर्य ने कहा, अच्छे राम भक्त बनिए, सबमें राम को देखिये, तभी राम को अपने पास पाएंगे। भगवान श्रीराम ने देश को एकजुट करने के लिए ही मानव रूप में जन्म लिया था। अनेक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा राम हमारे संस्कारों से ही हमें मिल पाएंगे। माता-पिता को चाहिए कि नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के विराट रूप के बारे में बता कर रामकथाओं में लेकर जाएं।

अपने व्याख्यान के दौरान ही बाबा सत्यनारायण मौर्य ने भगवान शंकर, श्रीराम और हनुमान जी के आकर्षक चित्र बनाए।

आध्यात्मिक गुरु एवं शिक्षाविद डॉ पवन सिन्हा ‘गुरु जी’ के व्याख्यान का विषय था ‘प्रशासन में राम’। उन्होंने कहा कि भारतीय होने का मतलब ही सनातनी है। परिवार राष्ट्र की सबसे छोटी इकाई होती है और जब परिवार टूटने लगता है तो देश टूटने में भी ज्यादा देर नहीं लगती। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में परिवार टूटने की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम एक संपूर्ण मनुष्य के रूप में अवतरित हुए। वे किसी को दुखी नहीं देख सकते थे। श्रीराम एक शिक्षक भी हैं और शिष्य भी। उनके राज में नीति, बिजनेस, राष्ट्र का चिंतन,प्रो एक्टिव एडमिनिस्ट्रेशन, रिवेन्यू सिस्टम, टैक्स सिस्टम, अपराध नियंत्रण कानून बेहतर और दुरुस्त रहे। अपराध हुए तो तत्काल उन पर नियंत्रण पा लिया गया। कर इतने व्यवस्थित रहे कि किसी को असंतोष नहीं हुआ। यही तो रामराज्य की वास्तविक खूबसूरती थी।

‘रामायण महोत्सव 5.0’ का शुभारंभ प्रख्यात कथक नृत्यांगना डॉ समीक्षा शर्मा के ग्रुप की शानदार प्रस्तुति से हुआ। मनोहारी नृत्य नाटिका में संपूर्ण रामायण दिखाई गई। कार्यक्रम की थीम थी-नृत्य में राम।

कथा गायक स्वामी संजय प्रभाकरानंद ने ‘संगीत में राम’ विषय पर काव्यात्मक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा, भगवान श्रीराम और संगीत एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। श्रीकृष्ण दिवानी मीरा का भजन, ‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’, पंडित भीमसेन जोशी का गाया अमर भजन, ‘राम का गुणगान करिये’, मोहम्मद रफी के गाए भक्तिगीत ‘जय रघुनंदन जय सियाराम’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम हर वर्ग, जाति, संप्रदाय के लोगों की रग-रग में बसे हैं।

वैज्ञानिक, लेखक और मानस अध्येता डॉ आदित्य शुक्ल ने ‘परिवार में राम’ विषय पर गंभीर-गहन शोधपरक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा, बाहर से-भीतर से एक जैसे हो जाएं, तभी भक्ति का बीज अंकुरित होगा। परिवार का महत्व बताने को ही भगवान श्रीराम ने मानव रूप में अवतार लिया था। रावण जैसे असुरों का तो वह बैकुंठ धाम से ही संहार कर सकते थे। श्रीराम ने अपने पिता, मां,धर्मपत्नी भाई, सखा, ससुर, निकट संबंधियों से बहुत कुछ सीखा और विश्व को इस सीख का अनुकरण करने का संदेश दिया। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का जो संदेश आज हर ओर दिया जा रहा है, वह राजा जनक उस काल में ही दे चुके थे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम को अनुभव करना हो तो तीन गुणों को धारण करिए- करुणा, कृपा और कृतज्ञता। श्रीराम को अपने परिवार का अंग बनाइये, रामरंग में सराबोर होने का आनंद तभी मिलेगा।

कवि, लेखक एवं व्यंग्यकार चिराग जैन ने ‘कविता में राम’ विषय पर काव्यपाठ करते हुए हनुमान जी के ओजस्वी व्यक्तित्व का वर्णन किया। जामवंत जी ने उन्हें उनकी शक्ति का अहसास करवाया और वह देखते ही देखते समुद्र को चुल्लू भर पानी समझ कर समुद्र को लांघ कर माता सीता की खोज में लंका पहुंच गए। चिराग जैन ने कहा कि समस्या का आकार छोटा कर दिया जाए तो समाधान जल्द हो जाता है।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के गोसेवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद फैज खां ने ‘राष्ट्र में राम’ विषय पर व्याख्यान दिया जिसमें ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ का उल्लेख करते हुए श्रीराम की उस समय की मनोदशा का विवरण दिया जब रावण वध हो चुका था और सोने की लंका की सुंदरता का बखान किया जा रहा था। तब भगवान श्रीराम ने कहा था कि मुझे मेरी मातृभूमि अयोध्या बुला रही है जो मेरे लिए स्वर्ग से भी बढ़कर है।

‘रामायण महोत्सव 5.0’ के दौरान विभिन्न राज्यों से आए चित्रकारों ने रामायण से संबंधित आकर्षक चित्र बनाए। प्रायोजक डॉ पवन कंसल द्वारा सभी चित्रकारों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई।

इस अवसर पर पांचजन्य के चेयरमैन अरुण गोयल, विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी, कविता अस्थाना, सूरीनाम के डिप्लोमेट पंडित नितिन जगबंधन, पूनम कंसल, कंसल, समर्थ कंसल, अजय बंसल, दिनेश गुप्ता, शिवकुमार गर्ग, गौरव गुप्ता, प्रदीप द्विवेदी, विजय बंसल, सुभाष बंसल, राजकुमार एवं विजय गर्ग मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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